दुनिया की चाल
ऐ दोस्त ! तुम्हें किस बात का मलाल है?
झूठी बातें, झूठे इरादे, ये तो दुनिया की चाल है।
झूठी बातें, झूठे इरादे, ये तो दुनिया की चाल है।
आलोचनाओं की सूई किसे चुभोते हो?
ये तो नेता हैं, गधों सी इनकी खाल है।
माँगना ही है चंदा, तो लड़के के बाप से पूछो,
हमारी चार कन्या हैं, हम तो कंगाल हैं।
नौकरी पानी है, तो कम्प्यूटर सीखना,
उच्च-शिक्षा में रोज़गारों की हड़ताल है।
गोरा-काला ये तो नैनों का भ्रम है,
इस आवरण के नीचे तो हर कोई कंकाल है।
हर समस्या का समाधान बुजुर्गों के पास है
तुम्हें मालूम नहीं "शैलेश" के घने-काले बाल हैं।
लेखन-तिथि- ०६ अप्रैल २००६ तद्नुसार विक्रम संवत् २०६३ चैत शुक्ल पक्ष की अष्टमी।