सोमवार, 28 मई 2007

महान बनो (हिंगलिश कविता)

महान होने की है यह पहली कंडिशन
विचारों में न हो तनिक फ़्लक्चुएशन।

प्रैक्टिकल बनकर न पहुँचोगे शीर्ष पर
हमेशा नज़रों के सामने रखो, अपना एम्बिशन।

टीवी चैनलों से सदैव सदाचार लेते रहो
बुरी आदतों को न दो मन में आने की परमिशन।

ये नहीं कि केवल मित्रों की बराबरी करो
रोज़ करते रहो तुम ख़ुद से भी कॉम्पटिशन।

जब भी तुम्हारे ऊपर ज़ुर्म या ज़्यादती हो
न भूलो कोर्ट में जाकर करना एक पटिशन।

भाई-भाई में रही है सदा ही झगड़ने की प्रथा
छोटी सी बात को लेकर न करो घर का पार्टिशन।

केवल अपना राग अलापना, अच्छे लक्षण नहीं
दो मौका सबको बोलने का, न समझो उन्हें अपोज़िशन।

शब्दार्थ-
कंडिशन-
शर्त, फ़्लक्चुएशन- उतार-चढ़ाव, प्रैक्टिकल- व्यवहारिक, एम्बिशन- महात्वकांक्षा, परमिशन- अनुमति, कॉम्पटिशन- प्रतिस्पर्धा, पटिशन- याचिका, पार्टिशन- विभाजन, अपोज़िशन- विरोधी।

लेखन-तिथि- २२ नवम्बर २००६ तद्‌नुसार विक्रम संवत् २०६३ मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष द्वितीया।

27 टिप्‍पणियां:

विकास कुमार ने कहा…

पहले लोग रोमन में हिंदी लिखते थे....! अब आप देवनागरी मे इंग्लिश लिखकर उसका बदला ले रहे हैं....?

देवेश वशिष्ठ ' खबरी ' ने कहा…

जय हो यूनिकोड की, जो अंग्रेजी भी हिन्दी में लिखी जा रही है और जय हो भारतवासियों की जो हिन्दी लिखकर अंग्रेजी सिखा रहे हैं।शुक्रिया भैया मेरे लिये अंग्रेजी सीखने का तरीका ज्यादा सुविधाजनक है।

रंजू ने कहा…

अच्छा प्रयास है ...सफल ही हैं आप तो [:)]

मोहिन्दर कुमार ने कहा…

कुछ खास मजा नही आया for yr information

Anupama Chauhan ने कहा…

english poem in hindi...thoda dhyaan aur de....is kavita par

ऋषिकेश खोङके "रुह" ने कहा…

अच्छा प्रयास है और आजकल ये एक प्रकार की शैली हो गई है , यदि आप बशीर बद्र जी को पढें तो आप पायंगे की हिंगलिश का उन्होने बडा ही सुंदर प्रयोग किया है | मैने भी एक ग़ज़ल मे कुछ ऐसा ही प्रयोग किया था
गार्डन मे बैठें,धुप सेकें |
कभी पाया ऐसा पल ना ||
तौबा!ये रोज़ का रुटिन |
वही,फिर वही करना ||
देखो संभालो जीवन 'रुह' |
पडे उसमे कहीं सल ना ||

Varun ने कहा…

hindi lavita me english shabdo lo laane me aap poori tarah safal rahe hain, aasha hai isi disha me aur kavitao ki.

........ज़ालिम ने कहा…

कविता पढकर एसा नहीं लगा कि यह भारतवासी जी की रचना है

Shrish ने कहा…

आपकी पोइम वैरी गुड है। मैं इसको रीयली लाइक किया। :)

अरुण ने कहा…

vah bhaI kya jugaD jugaDa hai
एक्शन मे परफ़ेक्शन है

sifar ने कहा…

ये नहीं कि केवल मित्रों की बराबरी करो
रोज़ करते रहो तुम ख़ुद से भी कॉम्पटिशन।
........................
........................

शैलेश जी , आपकी लिखी इस बात पर
’सबको ’ मनन करना चाहिये।

sifar ने कहा…

अगर यह प्रयोग था, तो प्रयोगधर्मिता के नाम पर सब जायज है.... बाकी रचना के बारे मे सारे विचार आपकी रचनाधर्मिता की वेदी को होम करता हूँ ।

बेनामी ने कहा…

maza nahi aaya bhai.....bilkul bhi nahi.......aap to hindi mein hi likhein....kuch bhi likh denaa kavita nahi ho sakta....prayog wahi accha jiska kuch faayda ho.......hindi ki kheer mein namak jaisi angrezi daalenge to zaayka to bigdega hi.....

कुमार आशीष ने कहा…

अगर बात कम्‍यूनिकेट हो रही हो तो बस इतने से बात बन जाती है, शैलेश जी। और ज्‍यादा क्‍या कहूं, हां जबरिया शब्‍दों का आलिंगन अथवा उनसे परहेज दोनो अति है। माधुर्य सदैव सहजता में है।

swapna ने कहा…

kavita ekadam 'apani' lagee aur achhibhi lagee

Anita ने कहा…

kavita achchi bani hai...aapki kavitaayen pehli baar padh rahi hun, papi kaun, wqut lagega...prashaniya hai..badhai

Udan Tashtari ने कहा…

शैलेश जी

जैसा कि आपने कहा; यह एक प्रयोग है. प्रयोगात्मक दृष्टि से यह निश्चित ही सराहनीय है. इस तरह के प्रयोगों के लिये हिम्मत की आवश्यकता होती है. बड़े बड़े कवि/ रचनाकार नये प्रयोगों से डरते हैं कि कहीं उनकी छबी को धक्का न लगे. आपने यह हिम्मत दिखाई, आप बधाई के पात्र हैं. और यह कतई जरुरी नहीं कि हर प्रयोग सफल ही हों या सभी को अनुकुल लगे.

कवित्त का पहला नियम है कि आपकी बात मन से निकली हो और आपको अच्छी लगे. दूसरा, जो आप कहना चाह रहे हैं एवं निहित संदेश पठकों तक पहुँचे, उसमें भी यह खरी उतरती है. बाकि मात्रा, प्रवाह, बहर, छंद आदि की गणना तो समय के साथ होती रहेगी, उस ओर से आप निश्चिंत रहें.

मैं यह कहने में भी नहीं हिचकिचाऊँगा कि रचना का स्तर वह नहीं है जो आपसे आपेक्षित है. मगर यह बात भी औचित्यहीन हो जाती है जबकि आप स्वयं कह चुके हैं कि यह एक नया प्रयोग है. इस शैली के अभ्यास से इसे भी आप एक दिन स्तरीय रचना का दर्जा दिलवा सकते हैं, ऐसा मेरा मानना है.

नये प्रयोग करते रहना चाहिये, मैं इस बात का पक्षधर हूँ और आपको बधाई देता हूँ.

यहाँ तक तो हो गये समीर लाल. अब उड़न तश्तरी एक बात जानना चाहती है; आपकी इन पंक्तियों पर:

टीवी चैनलों से सदैव सदाचार लेते रहो
बुरी आदतों को न दो मन में आने की परमिशन।

--यह आप किस चैनेल की बात कर रहे हैं, जहाँ से सदाचार ले सकें. मैं बहुत उत्सुक हूँ, उस चैनल के बारे में जानने को. कृप्या मार्गदर्शन करें. :)

Ripudaman ने कहा…

Shailesh,

:-) acchaa hai naye prayog karte rahnaa chaahiye.

par aaj kal jantaa experiment kerne walo ko kahtii hai .. ki iss ke thoughts allined nahin hai.. kabhi idhar bhagtaa hai kabhi udhar.. .. confuse saa lagtaa hai ..
magar mere vichaar se... kavitaa kee har vidhaa ko, aur har bhaav ki bhinn prakaar ki abhivyaktii se hee nikhaar aataa hai...

so tum likhte raho..
kavitaa kee drishti se tumhari ye gazal roopi kavitaa theek hai, koi bahut exciting nahin hai, jiss ko padd ker baar baar padney ko mann karey.. haan buss aisee hai, ek baar padd lo .. aur chuunki gay-yataa hai.. to .. kahh sakte hain haan theek hai.

so... aage bado buss...
shesh mangal hai.
shubh khaamnaayein.

Ripudaman

sunita (shanoo) ने कहा…

शैलेश अच्छा लगा कि आज आप भी लीक छोड़ आन्दोलन में शामिल हो गये हो...मगर आपकी एक अपनी पहचान है जो मुझे बेहद पसन्द है,..आपकी हर कविता एक नई प्रेरणा प्रदान करती है मगर आज आपने जो कविता लिखी है हमारी भारत की खिचड़ी भाषा को दर्शाती है...आज के युवा यही भाषा पसंद करते है,...जैसे की त्रीशंकु कि तरह बीच मे अटके हुए है ना ही सही तरह से हिन्दी आती है ना ही सम्पूर्ण ईन्गलिश का ही ज्ञान है...आपने इस कविता के माध्यम से अच्छा कटाक्ष किया है...हाँ होता है कभी-कभी किसी को समझाने के लिये खुद को भी बदलना पड़ता है...मगर इससे एक बात और सिध्द होती है कि आप अपनी शैली को भी बदलने में माहिर है आपसे किसी भी विषय पेर चर्चा की जा सकती है...

मेरा आशीर्वाद और मेरी शुभ-कामनाए सदैव आपके साथ है

सुनीता(शानू)

बेनामी ने कहा…

asdf

rajat ने कहा…

आपकी 'नई'कविता और 'नया' फोटो दोनो ही अच्छे लगे...

ajay ने कहा…

एक नये प्रयोग के लिहाज से रचना बुरी नहीं है, पर फिर भी आप के स्तर की नहीं है। बेहतर होता कि आप इस पर कुछ और मेहनत करते। रही बात हिंगलिश की, तो बशीर बद्र और फैज़ जैसे शायर इसका कई जगह बहुत बेहतरीन रूप से इस्तेमाल करते रहे हैं।

बेनामी ने कहा…

shailesh ji,
is baar aapki kavita padhkar laga hi nahi ki ye aapki kavita hai.....
bilkul bhi maza nahi aaya.....prayog karna sahi hai par sirf prayog karne k liye prayog karna main uchit nahi samajhta.....
halanki mujhe is field k baare mein bahut nahi maaloom hai par phir bhi aapki kavitaon ka prashanshak hone k naate chahunga ki aap aisi kavitaon se apne kalam ko door rakhe.......ummeed hai agli kavita mein phir wahi bharatwasi nazar aayega jiski kavitaein seedhe dil mein utar jaati hain

Suyash

priya sudrania ने कहा…

shailesh ji,

good poem .....experiments are neither good nor bad...they are just experiments.....it takes courage and oresightness to perform the experiments......good luck...

Rakesh Pasbola ने कहा…

इतनी अच्‍छी कविता के लिए शुक्रिया सच में आपने न कहते हुए भी बहुत कुछ कह दिया है

geet gazal ने कहा…

शैलेश जी नमस्कार. पहचाना क्या ? मैं मुंबई से पत्रकार मुकेश मासूम . शायद याद नहीं आया. खैर, आपने ही तो डेल्ही से फ़ोन करके मुझे हिन्दी ब्लॉग शुरू करने की जानकारी दी थी. आपका तहे-दिल से आभार व्यक्त करता हूँ .पुनः धन्यवाद .

बेनामी ने कहा…

No deposit bonuses - POKER money bankrolls
all possible no deposit bonuses starting bankrolls for free Good luck at the tables.

Donald Duck